मूसाबंगर दीवार प्रकरण: छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अफसरों की जवाबदेही पर सवाल

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कालाढूंगी । कालाढूंगी रेंज की मूसाबंगर बीट में पौधों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित सुरक्षा दीवार को लेकर सरकारी धन के भुगतान और विभागीय जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 2200 मीटर प्रस्तावित दीवार के मुकाबले करीब 1600 मीटर निर्माण होने की बात कही जा रही है। करीब 24.50 लाख रुपये के कार्य में यदि 600 मीटर दीवार कम होना जांच में प्रमाणित होता है, तो पूरा भुगतान किस आधार पर हुआ, यह बड़ा सवाल है।

मामले में रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड को चार्जशीट दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारी केवल मैदानी कर्मचारियों की थी?

जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान से पहले स्थलीय निरीक्षण किसने किया, MB में 2200 मीटर की माप किसने दर्ज व सत्यापित की, कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र किसने जारी किया और भुगतान किस अधिकारी ने स्वीकृत किया। साथ ही तत्कालीन DDO, SDO, लेखाकार, भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारी तथा अनुपालन समिति की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल

काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने और किसी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप भी जांच का विषय हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सामने आना चाहिए कि काम बांटने का निर्णय किसने लिया और किस स्तर पर इसकी स्वीकृति हुई।

केवल चार्जशीट नहीं, पूरी जिम्मेदारी तय हो

यदि जांच में कम निर्माण के बावजूद भुगतान, गलत माप, नियमों की अनदेखी या अन्य वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार सभी लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रथम दृष्टया सरकारी धन के गलत भुगतान के प्रमाण मिलने पर FIR और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए!

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि 2200 मीटर कार्य अभिलेखों में पूरा दिखाया गया और भुगतान हुआ, जबकि मौके पर 600 मीटर दीवार कम पाई गई, तो जवाबदेही सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक क्यों सीमित रहे?

जनता के पैसे का हिसाब चाहिए—जांच फाइल से मौके तक, माप से भुगतान तक और जिम्मेदारी छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक तय होनी चाहिए।