वन विभाग की कार्रवाई और जुर्माने की प्रक्रिया पर उठे सवाल, संयुक्त जांच रिपोर्ट का इंतजार
गैबुआ/कालाढूंगी। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के रामनगर वन क्षेत्र की बैलपड़ाव रेंज अंतर्गत गैबुआ के प्लॉट संख्या 4 और 5 में यूकेलिप्टस के पेड़ों के गिरने के बाद लकड़ी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 9 अक्टूबर 2026 को आई आंधी के बाद कथित अवैध कटान और लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़े जाने का मामला अब विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्रॉली को महज दो दिन के भीतर जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ दिया गया।
आंधी में गिरे पेड़ों की आड़ में कटान का आरोप?
जानकारी के मुताबिक, 9 अक्टूबर की दोपहर करीब एक बजे आए आंधी-तूफान में गैबुआ के प्लॉट संख्या 4 और 5 में यूकेलिप्टस के कई पेड़ गिर गए थे। आरोप है कि गिरे हुए पेड़ों की आड़ में खड़े पेड़ों का भी कटान किया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट से होना बाकी है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आंधी में गिरे पेड़ों और कथित तौर पर काटे गए खड़े पेड़ों की पहचान किस आधार पर की गई। क्या वन विभाग ने मौके पर पेड़ों की संख्या, लकड़ी की मात्रा और परिवहन से संबंधित अभिलेखों का विधिवत सत्यापन किया?
ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी, फिर दो दिन में कैसे छूटी?
मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर विशेष टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया जाता है कि जांच में बैलपड़ाव रेंज के साथ दूसरी रेंज के कर्मचारियों को भी लगाया गया था। इसी दौरान यूकेलिप्टस की लकड़ी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़े जाने की बात सामने आई।
लेकिन वाहन को दो दिन के भीतर छोड़े जाने की चर्चा ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कितने रुपये का जुर्माना लगाया गया, लकड़ी की कुल मात्रा कितनी थी और वाहन छोड़ने का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
एसडीओ बोली —आंधी में गिरे थे करीब 200 पेड़
इस मामले में रामनगर के उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) किरण शाह ने बताया कि आंधी के दौरान करीब 200 पेड़ गिरे थे। उन्होंने मौके पर अवैध पातन की कोई सूचना होने से इनकार किया। साथ ही बताया कि वन निगम और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरे क्षेत्र का मूल्यांकन कर रही है।
पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्रॉली को छोड़े जाने के संबंध में उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी से जानकारी लेने की सलाह दी। ऐसे में अब संयुक्त मूल्यांकन रिपोर्ट और वाहन को छोड़ने से संबंधित दस्तावेजों के सामने आने का इंतजार है।
उत्तर प्रदेश तक लकड़ी पहुंचाने की चर्चा?
सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि गैबुआ से निकली यूकेलिप्टस की लकड़ी को उत्तराखंड की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के स्वार क्षेत्र स्थित लकड़ी की टालों तक पहुंचाने की तैयारी थी। हालांकि, लकड़ी के वास्तविक गंतव्य और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जांच रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई सवालों के जवाब?
गैबुआ प्रकरण में अब वन विभाग और वन निगम की संयुक्त मूल्यांकन रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। साथ ही ट्रैक्टर-ट्रॉली की जब्ती और रिहाई के दस्तावेज, जुर्माने की रसीद, लकड़ी की मात्रा, परिवहन संबंधी अभिलेख और घटनास्थल के निरीक्षण की रिपोर्ट से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल सवाल यही है कि आंधी में गिरे करीब 200 पेड़ों का आकलन किस आधार पर किया गया और पकड़ी गई लकड़ी से संबंधित कार्रवाई किन नियमों के तहत की गई? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामले में नियमों के अनुरूप कार्रवाई हुई या कहीं कोई अनियमितता हुई है।

