कालाढूंगी रेंज परिसर में दो हरे आम के पेड़ों पर चली आरी, DFO ने रेंजर को थमाया नोटिस

 

 

 

 

सरकारी परिसर में पेड़ कटान पर उठे सवाल, लकड़ी कहां गई और कटान की अनुमति किसने दी? जांच के घेरे में पूरा मामला

 

कालाढूंगी, नैनीताल। आम जनता को पेड़ों के संरक्षण का संदेश देने वाले वन विभाग के अपने ही परिसर में दो हरे आम के पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। रामनगर वन प्रभाग की ऐतिहासिक कालाढूंगी रेंज परिसर में हुई इस घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने रेंज अधिकारी जीवन उप्रेती को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मीडिया के सामने आया मामला, DFO ने किया निरीक्षण

जानकारी के अनुसार, कालाढूंगी रेंज परिसर में सरकारी धनराशि से मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसी दौरान परिसर में खड़े दो आम के पेड़ों के कटान की जानकारी सामने आई। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, कटान से संबंधित तस्वीरें जीपीएस लोकेशन के साथ डीएफओ के समक्ष रखी गईं। इसके बाद डीएफओ ने मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों के अवशेषों का निरीक्षण किया।

मामले के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि परिसर में पेड़ों को काटने की जरूरत क्यों पड़ी और इसके लिए सक्षम अधिकारी से विधिवत अनुमति ली गई थी या नहीं।

कटे पेड़ों की लकड़ी कहां गई?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल कटे हुए आम के पेड़ों की लकड़ी को लेकर है। पेड़ काटे जाने के बाद उनसे निकली लकड़ी कहां रखी गई, उसका विभागीय रिकॉर्ड तैयार हुआ या नहीं और उसका निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया—इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

मीडिया की ओर से लकड़ी के ठिकाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर डीएफओ ने जांच किए जाने की बात कही। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि लकड़ी परिसर में ही सुरक्षित रखी गई है या उसे कहीं अन्य स्थान पर ले जाया गया।

कटान की अनुमति और जिम्मेदारी पर सवाल

सरकारी परिसर में पेड़ों के कटान को लेकर यह भी जांच का विषय है कि क्या इसके लिए लिखित आदेश जारी किया गया था। यदि अनुमति दी गई थी, तो किस अधिकारी ने और किन परिस्थितियों में दी? वहीं, यदि बिना अनुमति कटान हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

रेंज परिसर में चल रहे मरम्मत कार्य और पेड़ों के कटान के बीच किसी संबंध की भी जांच आवश्यक है। हालांकि, फिलहाल किसी अधिकारी या ठेकेदार की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

रेंजर से जवाब तलब, जांच के नतीजों पर नजर

प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने मामले में रेंज अधिकारी जीवन उप्रेती को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब रेंजर के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की उम्मीद है।

बड़े सवाल:

– दो हरे आम के पेड़ों को काटने का आदेश किसने दिया?

– क्या कटान के लिए सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति थी?

– कटे हुए पेड़ों की लकड़ी कहां है और उसका रिकॉर्ड क्या है?

– मरम्मत कार्य के दौरान पेड़ों के कटान की जरूरत क्यों पड़ी?

– जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद क्या विभागीय कार्रवाई होगी?

 

वन विभाग की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे। फिलहाल कालाढूंगी रेंज परिसर में पेड़ों के कटान का यह मामला विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।

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